उदयपुर (अमोलक न्यूज Amolak News)। वाणिज्य एवं प्रबंधन अध्ययन महाविद्यालय, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में प्रथम प्रो. विजय श्रीमाली स्मृति व्याख्यान 2026 का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी. पी. सारस्वत ने की। मुख्य वक्ता के रूप में पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात समाजसेवी एवं नवाचारी प्रशासक श्री श्यामसुन्दर जी पालीवाल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम संयोजक डॉ देवेंद्र श्रीमाली ने बताया की अपने ओजस्वी उद्बोधन में श्री श्यामसुन्दर जी पालीवाल ने कहा कि समाज में वास्तविक परिवर्तन नीतियों या भाषणों से नहीं, बल्कि धरातल पर लगातार किए गए कर्म से आता है। उन्होंने कहा कि पिपलांत्री मॉडल इसी सोच का परिणाम है, जहाँ खनन क्षेत्र से घिरे एक गाँव को सस्टेनेबल डेवलपमेंट और स्वरोज़गार के केंद्र में बदला गया। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा इस दिशा में 150 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट स्वीकृत होना इस मॉडल की विश्वसनीयता और सफलता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि पिपलांत्री में लाखों वृक्ष आज केवल हरियाली नहीं, बल्कि हज़ारों परिंदों का घरौंदा बन चुके हैं। कन्या जन्म पर 111 पौधे लगानेकी परंपरा ने पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक चेतना से जोड़ दिया है। और आज पिपलांत्री 1.5 करोड़ से अधिक की आय कार्बन क्रेडिट से कर रहा है जो की भारत में पंचायत स्तर पर प्रथम प्रयास है ! उन्होंने यह भी बताया कि बाँस से बैंबू प्रोडक्ट, आँवला, जामुन और एलोवेरा की खेती तथा उनकी उपज से जुड़े प्रोसेसिंग उद्योगों ने गाँव में रोज़गार के नए अवसर पैदा किए हैं, पलायन को रोका है और आत्मनिर्भरता को मज़बूत किया है।
श्री पालीवाल ने कहा कि नेतृत्व करते हुए सीखते रहना ही सच्चा नेतृत्व है। नेतृत्व का अर्थ पद नहीं, बल्कि जिम्मेदारी को बोझ नहीं, कर्तव्यसमझकर निभाना है। उन्होंने कहा कि विरोध और कठिनाइयों के बावजूद सिद्धांतों से समझौता न करना ही नेतृत्व की असली कसौटी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मजबूत लोकतंत्र, स्थानीय रोज़गार और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलें, तभी बेहतर भारत का निर्माण संभव है—और यही पिपलांत्री मॉडल का मूल संदेश है।
सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी. पी. सारस्वत ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि प्रो. विजय श्रीमाली ऐसे व्यक्तित्व थे जो केवल अपने समय में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में स्थायी रूप से बस जाते हैं। विद्यार्थियों की फीस भरना, जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी में सहयोग करना और सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के साथ चट्टान की तरह खड़े रहना उनके स्वभाव का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि कुलपति, डीन, स्पोर्ट्स बोर्ड चेयरमैन और प्रॉक्टर जैसे पद उनके परिचय थे, लेकिन उनकी असली पहचान थी—कर्तव्य को बोझ नहीं, धर्म समझकर निभाना। लॉ कॉलेज के पीछे की बंजर भूमि को हजारों पेड़ों से हरा-भरा करना उनकी दूरदृष्टि और भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह स्मृति व्याख्यान शोक नहीं, बल्कि उन मूल्यों की निरंतरता का प्रतीक है, जिन्हें प्रो. विजय श्रीमाली ने हमें विरासत में दिया।

विशिष्ट अतिथि श्री रविंद्र श्रीमाली ने प्रो. श्रीमाली के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें प्रकृति और समाज सेवा के क्षेत्र में धरातल पर काम करने वाला कर्मयोगी बताया। युवाओ से उन्हीने प्रो श्रीमाली के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेकर समाज हित में आगे आने का आह्वाहन किया !
कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन वाणिज्य महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. शूरवीर सिंह भाणावत ने दिया एवं डॉ. देवेंद्र श्रीमाली ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक डॉ देवेंद्र श्रीमाली, प्रो. विजय श्रीमाली के पुत्र एवं होटल एसोसिएशन उदयपुर के पूर्व सचिव जतिन श्रीमाली , डॉ. शिल्पा वर्डिया, डॉ. शैलेन्द्र सिंह राव, डॉ. हेमराज चौधरी, डॉ. सचिन गुप्ता, डॉ. विनोद कुमार मीणा, डॉ. रेनू शर्मा, डॉ. आशा शर्मा, डॉ. पारुल दशोरा, डॉ. पुष्पराज मीणा सहित अनेक शिक्षकगण उपस्थित रहे।

शहर भर के शिक्षाविद एवं राजनैतिक व्यक्तित्व प्रो. जी. सोरल, प्रो. सी. पी. जैन, प्रो. पी. के. सिंह, प्रो. ओ. पी. जैन, प्रो. बी. एल. हेड़ा, भाजपा नेता अनिल सिंघल, सिद्धार्थ शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने शिरकत की। बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। यह स्मृति व्याख्यान प्रो. विजय श्रीमाली को सच्ची श्रद्धांजलि और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के संकल्प का सशक्त संदेश बनकर उभरा।
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