लकड़ी से बनी अनुष्ठानिक विरासत की प्रदर्शनी का डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने किया उद्घाटन

उदयपुर (अमोलक न्यूज Amolak News)। डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने उदयपुर सिटी पैलेस म्यूजियम के ऐतिहासिक छोटा दरिखाना में लगी ‘प्रतिध्वनियाँ : लकड़ी में अनुष्ठानिक विरासत’ का उद्घाटन किया। भारत में पहली बार उदयपुर सिटी पैलेस में प्रस्तुत इस विशिष्ट प्रदर्शनी में बेनिन, टोगो और नाइजीरिया से लकड़ी और धातु में निर्मित 40 से अधिक अनुष्ठानिक वस्तुओं को एक साथ प्रदर्शित किया गया है। ये कलाकृतियाँ पश्चिम अफ्रीका की मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं की एक महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करती हैं।

इस अवसर पर महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा यह आयोजन मात्र एक प्रदर्शनी नहीं बल्कि धरोहर, कला और विरासत का सम्मान है। जो भारतीय संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को चरितार्थ करती है। यह वैश्विक स्तर पर सार्वभौमिक भाईचारे, एकता, सम्मान और परस्पर जुड़ाव को बढ़ावा देने में मेरे पुरखों द्वारा स्थापित फाउंडेशन के सफल प्रयास है।

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर श्रीमती निवृत्ति कुमारी मेवाड़, प्रोफेसर फिलिप शालिये और डॉ. तुलिका गुप्ता सहित देश-विदेश के अनेक अतिथि उपस्थित रहे। प्रदर्शनी के क्यूरेटर प्रो. फिलिप शालिये ने बताया कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य यह दर्शाना है कि अनुष्ठानिक परंपराएँ किस प्रकार मानव, प्रकृति और देवत्व के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायक होती हैं। यह विचार भारतीय सांस्कृतिक एवं दार्शनिक परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है, जहाँ अनुष्ठान और आध्यात्मिकता जीवन का अभिन्न अंग रहे हैं।

“प्रतिध्वनियाँ: लकड़ी में समाहित एक औपचारिक विरासत” नामक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का 14 फरवरी 2026 से 14 अप्रैल 2026 तक आयोजन होगा। प्रदर्शनी प्रो. फिलिप शालिये द्वारा प्रस्तुत की जा रही है। प्रदर्शनी का आयोजन महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन उदयपुर, एलायंस फ्रांसेज जयपुर तथा फ्रेंच इंस्टीट्यूट इन इंडिया के सहयोग से किया गया है।

प्रो. पी. शालिये एक प्रतिष्ठित मानवविज्ञानी, पुरातत्वविद एवं फॉरेंसिक चिकित्सा विशेषज्ञ हैं। वे पेरिस स्थित म्यूजे दु क्वे ब्रांली में पूर्व शोध निदेशक रह चुके हैं तथा वर्तमान में यूनिवर्सिटी पेरिस-सैक्ले में प्रोफेसर हैं। उनका बहुआयामी शोध कार्य सांस्कृतिक विरासत, मानव इतिहास और आध्यात्मिक परंपराओं के गहन अध्ययन पर आधारित है।

यह प्रदर्शनी सांस्कृतिक संवाद को सशक्त बनाते हुए दर्शकों को एक अंतर-सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करेगी। कला, इतिहास और आध्यात्मिकता में रुचि रखने वाले सभी दर्शकों के लिए यह एक अद्वितीय अवसर है। कार्यक्रम का परिचय सुश्री संजना सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया और प्रदर्शनी से संबंधित कैटलॉग लॉन्च की गई।

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